देसी शादी, विदेशी मेहमान
बारात पूरे शवाब पर थी। बाजे वाले पूरी ताकत से बजा रहे थे तो बाराती उससे ज्यादा जोर लगाकर नाच रहे थे। कहीं नागिन डांस चल रहा था तो कोई ढोल की थाप पर झूम रहा था। इन सबके बीच दूल्हे मियां बग्गी पर बैठे मंद मंद मुस्कुरा रहे थे। ऐसा पूरे एक घंटे से चल रहा था और बारात चंद कदम ही बढ़ पाई थी। नोएडा के जिस सेक्टर में ये बारात आई थी वो चारों ओर गांव से घिरा है। जहां ये सेक्टर बना वहां कभी इस गांव के खेत हुआ करते थे। कहने को ये गांव है पर यहां जरूरत की हर वो चीज मौजूद है जो शहर में होती है। इसी गांव की पोस्ट ग्रेजुएट लड़की से हमारे घनिष्ठ साथी की शादी हो रही थी। इस शादी के लिए हमारे सर्कल में आए एक नए मित्र को भी सपरिवार निमंत्रण मिला। वो अपनी स्पैनिश पत्नी और दो बच्चों के साथ शादी में शामिल होने को तैयार थे लेकिन उनकी एक दिक्कत थी। उनकी पत्नी की एक महिला मित्र भी स्पेन से आकर उनके घर ठहरी हुई थी। दोस्त अपने परिवार के साथ शादी में जाना चाहते थे पर परेशान थे कि इस दौरान अपनी पत्नी की मित्र को कहां ठहराएं। उन्होंने अपनी ये प्रॉब्लम साझा की तो हमने सलाह दी उसे भी विवाह समारोह में ले चलो। बारातियों के जहां खाने पीने का इंतजाम किया था वो अच्छा खासा चौड़ा मैदान था जिसे शामियाने लगाकर चारों ओर से कवर कर लिया गया था। वहां तक बारात पहुंचने में अभी देर थी बावजूद इसके वहां काफी लोग स्नैक्स, चाय कॉफी का आनंद ले रहे थे। दोस्त भी अपने दो बच्चों, विदेशी पत्नी और उसकी फ्रैंड के साथ सीधे वहां आ पहुंचे। जैसे वो पंडाल में आए उत्सुकता वश सभी की नजरें उन पर टिक गई। कई को तो मैंने भी ये कहते सुना कि ये अंग्रेज कहां से आ गए। लेकिन काबिल-ए-तारीफ बात ये थी कि दोस्त की स्पैनिश पत्नी ने इस मौके पर जहां साड़ी पहनी हुई थी वहीं उनकी पत्नी की दोस्त सूट सलवार में थी। शादी की गरिमा के मुताबिक दोनों के वस्त्र थे। हम सब से हाय हैलो करने के बाद वो दोनों स्पैनिश महिला एक जगह बैठ गई। दोनों बच्चे वहां लगे फव्वारे और झूलों के साथ मस्त हो गए। बैरे उन्हें स्नैक, क़ॉफी सर्व करने लगे। उन दोनों की नजरें एक दूसरे पर थी और बाकी सबकी नजरें उन दोनों पर। हर दो मिनट के बाद कोई ना कोई बैरा उन्हें कुछ ना कुछ सर्व कर रहा था। इतने में दोनों बच्चे खेलते हुए अपनी मम्मी के पास आ पहुंचे। उन्होने कुछ खाने के लिए हिन्दी में जिद की लेकिन मां ने जवाब स्पैनिश में दिया। बच्चे घूमकर पापा के पास आ गए। पापा हम लोगो के साथ किसी चर्चा में मशगूल थे। बच्चों ने कहा उन्हें खाना खाना है। पापा ने कहा मम्मी से जाकर बोलो। बच्चे मम्मी के पास लौट गए। मैंने कहा बच्चे अच्छी हिन्दी बोल लेते है। दोस्त ने जवाब दिया, बेटा अभी सात साल का हैं लेकिन हिन्दी, इंग्लिश, स्पैनिश के साथ बांग्ला भी बोल लेता है। बांग्ला इसलिए कि दोस्त की मां यानी बच्चे की दादी कोलकाता में रहती है। जब भी वो दिल्ली आती हैं हिन्दी कम आने के कारण पोते से बांग्ला में बात करती हैं इसलिए वो बांग्ला में भी पारंगत हो गया है। बच्चे की मां शादी के आठ साल बाद हिन्दुस्तान में रहने के बावजूद हिन्दी में कच्ची है, दोस्त ने मुस्कुराते हुए कहा। अचानक सभी की नजरें पंडाल के गेट पर टिक गई। शादी के मंडप में दुल्हन धीमे कदमों से आ रही थी। दोनों स्पैनिश महिलाएं उठी और अपने अपने मोबाइल निकाल उ नका वीडियो बनाने में बिजी हो गई। दुल्हन की नजरें जो इस दौरान झुकी रहती है वो भी कौतुहलता से देखने लगी कि ये विदेशी मेहमान कौन है ? दोनों ने आगे बढ़कर दुल्हन से हाथ मिलाया और उसके साथ अपने मोबाइल से सेल्फी ली। विवाह समारोह के बाद लौटते हुए मैंने इन दोनों स्पैनिश महिलाओं से इंग्लिश में पूछा कि उन्हें कैसा लगा? दोस्त की पत्नी तो ऐसे कई फंक्शन पहले भी अटेंड कर चुकी थीं लिहाजा उसकी प्रतिक्रिया अच्छी थी लेकिन स्पेन से आई उसकी दोस्त का कहना था कि शादी में मिस मैनजमेंट था। प्लेट देने के लिए कोई नहीं था। खाना लेने के लिए बेतरतीब ढंग से लोग आ रहे थे और एक दूसरे पर चढ़कर खाना ले रहे थे। उन्हें क्यू में आना चाहिए था। मैंने उन्हें समझाया कि हिन्दुस्तानी शादियों में क्यू नहीं होती। यहां ऐसे ही रेलमपेल में खाना लेना और खाना होता है। यही यहां का दस्तूर है ।
Comments