गड्डों में देश
हिन्दुस्तान को गड्डों से काफी प्यार है। सुबह चिकनी सड़क बनती है, अगली सुबह वहां एक चौड़ा गड्डा बन चुका होता है। कुछ बुद्धिजीवियों का मानना है कि कभी एलियन मिले तो वो पाताल में इन्हीं गड्डों के जरिये मिलेंगे। हिन्दुस्तान के जर्रे जर्रे में रोजाना इतने गड़डे खुदते हैं कि कहीं भी किसी भी गड्डे से एलियन निकल सकते हैं। नासा नाहक ही अरबों डॉलर खर्च कर अंतरिक्ष में एलियन की खाक छान रहा है । उसे भारतीय गड्डों पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।
रोचक ये है कि गड्डे चांद पर भी हैं और गोल्फ के मैदान में भी। चांद के गड्डे धरती से दिखते हैं, धरती के गड्डे चांद से। नील आर्मस्ट्रांग ने चांद पर कदम रखते ही भारतीय गड्डों की खूबसूरती का खूब आनंद लिया था। कुछ गड्डे दीर्घायु होते है तो कुछ पैदा होते ही भर दिए जाते हैं। जो पैदा होते ही भर दिए जाते हैं देर सवेर उनकी किस्मत में फिर खुदना लिखा होता है।
गड्डे कई प्रकार होते हैं। ठेकेदार के जरिये कमीशन खाने के लिए बनाए गए गड्डे। फालतू बजट को निपटाने के लिए जबरदस्ती बनाए गए गड्डे, बाऱिश के दौरान सड़क धंसने से बनने वाले गड्डे और दूसरो के लिए खोदे गए गड्डे। जिस तरह का गड्डा उसका उस तरह का नेचर।
गड्डे का समाजशास्त्र कहता है कि ये जितनी तेजी से खुदते हैं उतनी तेजी से भरे नहीं जाते। हर गड्डे की किस्मत में हजारों गाली और बददुआएं होती हैं। कुछ को सरकार भरती है, कुछ को गंदगी तो कुछ महज कागजों में भरे जाते हैं। कुछ गड्डे पांच एक साल जवां होने के बाद गटर में तब्दील हो जाते हैं। ऐसे गड्डों के आगे सरकार बोर्ड लगवा देती है, सावधान आगे गड्डा है। लेकिन उसे भरने का पाप वो हरगिज मोल नहीं लेती।
कुछ गड्डे इसलिए बनाए जाते हैं कि उनमें देश के नौनिहाल गिरे। नौनिहाल गिरते हैं तो खबर बनती है। गड्डे को खोदने वाले की खोज शुरू होती है। लेकिन गड्डे खोदने वाला नहीं मिलता क्योंकि वो वहां से दूर दूसरा गडडा खोद रहा होता है। गड्डा खोदना उसका पेशा है और उन्हें खुला छोड़ना उसका धर्म।
कहा जाता है कि जो जमीन से जुडे होतें हैं गड्डे वो ही खोदते हैं। शहर कोई भी हो, उसकी पहचान वहां खुदे गड्डों से होती है। किसी भी मशहूर शहर की सड़क पर सरपट दौड़िये अचानक एक गड्डा ऐसा आता है कि शरीर का जर्रा जर्रा हिल जाता है और नानी का नाम जुबां पर आ जाता है। आप उस गड्डे बनाने वाले का शुक्रिया अदा करते हैं। अगर ये गड्डा ना होता तो चिकनी सड़क पर ड्राइव करते आंख लग सकती थी और हादसा हो सकता था। ऐसे गड्डे जगाए रखते हैं हमको भी, सरकार को भी।
तेरे शहर के गड्डों का अंदाज निराला है।
क्या छोटा, क्या बड़ा ।
आह निकालने वाला है।
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