संकट के बादलों में ध्रुव
ध्रुव हेलिकॉप्टर की दुर्घटनाओं में बुधवार को एक और हादसा जुड़ गया। जम्मू कश्मीर के बांदीपोरा जिले में
सेना के ध्रुव हेलिकॉप्टरके दुर्घटनाग्र्रस्त होने पर इसे उड़ा रहे लेफ्टीनेंट कर्नल राज गुलाटी और मेजर
ताहिर हुसैन खान की मौत हो गई। नियमित ट्रेनिंग पर निकला ये हेलिकॉप्टर उड़ान भरने के तीस मिनट
बाद ही गिर गया। सेना ने हालांकि हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं लेकिन स्वदेशी एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर
ध्रुव लगातार देश और विदेशी धरती पर हादसों का शिकार हो रहा है।
इस ताजे हादसे से दस दिन पहले ही इक्वाडोर सरकार वहां उसकी उड़ान पर लगा लगा चुकी है।
इस साल 13 और 27 जनवरी को लगातार हुए दो हादसे के बाद इक्वाडोर वायुसेना ने अपने
ध्रुव हेलिकॉप्टर के बेड़े को खड़ा कर दिया है। जिससे भारत को बड़ा झटका लगा है।
वहां की सरकार ने इन हादसों की जांच के लिए एक कमेटी बनाई है। इक्वाडोर ने अपनी वायुसेना
के लिए 2009 में सात ध्रुव हेलिकॉप्टर भारत से खरीदे थे जिनमें दो पहले और दो इस साल हादसे
के शिकार हुए है। कुल मिलाकर इक्वाडोर के सात में से चार ध्रुव हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं।
इन हादसों की जांच के लिए हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की टीम इक्वाडोर में मौजूद है
लेकिन इन घटनाओं से ध्रुव के निर्यात करने की भारत की कोशिशों को बड़ा धक्का लगा है।
ऐसा पहली बार नहीं है जब ध्रुव के विदेशों में परिचालन पर रोक लगी है।
इससे पहले हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानि एचएएल के बनाए ध्रुव हेलिकॉप्टर
पर लैटिन अमेरिकी देश चिली भी अपने यहां हुए हादसों के बाद उसकी उड़ान पर रोक लगा चुका है।
विदेश के साथ देसी धरती पर हो रहे ध्रुव के हादसों से देश अपने होनहार अफसरों को खो रहा है।
पिछले साल 25 जुलाई को यूपी के बरेली से इलाहाबाद के लिए वायुसेना का ध्रुव हेलिकॉप्टर 6 आला
अफसरों के साथ रवाना हुआ लेकिन सीतापुर में क्रैश हो गया। जिससे इसमें सवार वायुसेना के सभी
6 होनहार अफसरों की मौत गई। अपने 6 आला अफसरों को खोने के बाद वायुसेना ने ध्रुव के बेड़े को
अस्थाई तौर पर सेवा से हटा दिया। अप्रैल 2011 में सिक्किम में ध्रुव हादसे का शिकार हुआ।
मई 2013 में सियाचीन में सेना के ध्रुव हेलिकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद उसकी काबिलियत
पर सवाल उठने लगे। अक्टूबर 2011 में बीएसएफ के ध्रुव हेलिकॉप्टर के रांची में दुर्घटनाग्रस्त
होने पर उसमें सवार तीन जवानों की मौत हो गई। इसके बाद ऊंचाई वाले इलाके में एडवांस लाइट
हेलिकॉप्टरों को इस्तेमाल करने वाली सेना ने भी उसकी उड़ानों पर रोक लगा दी।
ध्रुव को अपने बेडे में शामिल करने के लिए वायुसेना ने 2012 हरी झंडी दी थी।
फिर ऐसा क्या हुआ कि महज दो सालो में वायुसेना ने उसे ग्राउंडिड करने का आदेश दे दिया।
इसके पीछे विश्वास का संकट है। जिस उत्साह के साथ ध्रुव हेलिकॉप्टर को वायुसेना और आर्मी
के बेड़े में शामिल किया गया उसके अच्छे नतीजे नहीं रहे। पहले छह सालों में ध्रुव हेलिकॉप्टरों
के साथ सात बड़े हादसे हुए जिसमें कई होनहार अफसरों को जान गंवानी पड़ी। सिर्फ वायुसेना ही नहीं,
सेना के अलावा जिस भी संस्थान के पास ध्रुव हेलिकॉप्टर है वो ऐसे हादसों से जुझ रहे हैं।
दरअसल अपने निर्माण के समय से ध्रुव हेलिकॉप्टर काफी चर्चा में रहा है। सरकारी कंपनी
हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने 1984 में जर्मनी की मदद से इसका डिजायन बनाया।
आठ साल बाद सन 1992 में इसका पहला प्रोटोटाइप तैयार हुआ। अगले दस साल तक
एचएएल में ध्रुव हेलिकॉप्टर बनाने का काम धीमी गति से चलता रहा । कई सरकारें आई
गई लेकिन ध्रुव का उड़ने का सपना ख्वाब ही रहा। फिर 16 अगस्त 2002 में ध्रुव ने पहली
परीक्षण उड़ान भरी। इस दौरान ध्रुव को मूर्त रूप देने में एचएएल तीन अरब 76 करोड़ रुपए खर्च
कर चुका था ।
पहला स्वदेशी हेलिकॉप्टर तो तैयार था पर खरीददार कोई नहीं था। इस दौरान भारतीय तटरक्षक बल
आगे आया और उसने नौ हेलिकॉप्टर खरीद लिए। इसके बाद इंडियन आर्मी की एविएशन विंग ने
इसका ऑर्डर दिया। 2002 से आर्मी ऐसे 140 हेलिक़ॉप्टर खरीद चुकी है जिसमें ध्रुव के दो वर्जन
एमके वन के 56 और एम-2 हेलिकॉप्टर शामिल हैं। वायुसेना के पास ध्रुव की सरसावां एयरबेस
पर एक स्कवाड्रन है। हाईमनूवरिंग क्वालिटी और तेज मारक क्षमता के कारण दुश्मन को चकमा
देने में ध्रुव हेलिकॉप्टर बेजोड़ हैं। कई मामलों में ये रूस के एमआई 17 हेलिकॉप्टर से भी अव्वल
बैठता है। उस पर पुरजे और मरम्मत के लिए सेना को विदेश का मुंह ताकना नहीं पड़ता।
पर्वतीय क्षेत्र में नोज अप और नोज डाउन की पोजिशनिंग में भी वह खड़ा हो जाता है।
चारो ओर घूमकर सुरक्षा घेरा तैयार करने और दुश्मन से निपटने में भी धुव्र की फुर्ती बेजोड़ है।
ध्रुव हेलिकॉप्टर धीमी गति से उड़ने वाले दुश्मन के लक्ष्य को भेदने, उसकी एयर डिफेंस
प्रणाली को नष्ट करने और हेलिकॉप्टरों के विशेष अभियानों को सुरक्षा कवच मुहैया कराने
में सक्षम है। ध्रुव का राहत-बचाव अभियानों, हवाई सुरक्षा देने और टैंकों के भेदने में लाजवाब रिकॉर्ड रहा है ।
ध्रुव हेलिकॉप्टरों पर 20 एमएम की टोरंट गन 70 एमएम, कैलिबर रॉकेट हवा से हवा में मार
करने वाली मिसाइलों और कलस्टर बमों को भी लगाया जा सकता है इस हेलिकॉप्टर की एक खास
विशेषता इसके पायलट के हेलमेट पर लगी एक डिजिटल प्रणाली है जिसे पहन कर पायलट जिस
ओर नजरें घुमाता है, गन का निशाना भी उसी ओर घूम जाता है । इसका सबसे हल्का
वर्जन 5.8 टन का है जिसकी रफ्तार 268 किलोमीटर प्रतिघंटे है। फिर ऐसी क्या वजह है जिससे
देश और विदेश में ध्रुव के परिचालन पर रोक लग रही है और इसके वजूद पर सवाल उठने लगे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसका ज्यादा वजन इसका सबसे बडा दुश्मन है। दूसरे हेलिकॉप्टरों के
मुकाबले इसमें सुविधाएं भी कम हैं। दो इंजन वाले इस हेलिकॉप्टर के वजन के कारण ये हादसों
का शिकार हो रहा है। एचएएल ने जब इसे प्लान किया था तब इसका वजन कम था लेकिन वजूद
में आने पर कई गुना बढ गया।
हांलाकि सरकार ध्रुव हेलिकॉप्टर के साथ है। सरकार ने तटरक्षक बल और नौसेना के लिए
32 उन्नत हल्के हेलिकॉप्टर धुव्र की आपूर्ति के लिए 7,000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को पिछले साल
मंजूरी दी है। इसके तहत सरकारी कंपनी एचएएल तटरक्षक बल और नौसेना दोनों को 16-16 हेलिकॉप्टरों की
आपूर्ति करेगी और साथ ही इनके रखरखाव की सेवा देगी ताकि ये निर्बाध तरीके से उड़ सकें ।
इक्वाडोर और चिली में ध्रुव के परिचालन पर रोक लगने के बावजूद राहत की बात ये है कि
बोलिविया, हमारे पड़ोसी देश नेपाल, मालदीप, म्यामांर और मॉरिशस की सेना और अर्धसैनिक
बल इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। हमारे देश में भी कई राज्य सरकार इस हेलिकॉप्टरो
को अपने यहां की कानून व्यवस्था पर नजर रखने और नक्सलवाद से निपटने के लिए खरीदने जा
रही है। पर ध्रुव के बढते हादसे इसके खरीदार के बढते कदमो को रोक रहे हैं। रक्षा क्षेत्र का
बाजार बहुत बड़ा है और इसमें हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड काफी कुछ कर सकती है।
इसके लिए उसे पहले ध्रुव की खामियों को दूर करना
होगा ताकि ये हादसा रहित लंबी और ऊंची उड़ान भर सके ।
Comments