मेट्रो में बातों की सवारी

ये लगातार उसकी चौथी कॉल थी। नोएडा से द्वारका की ओर जा रही मेट्रो ट्रेन में वो लगातार ऊंची आवाज में बात कर रहा था। पच्चीस छब्बीस साल के इस नौजवान ने पहले अपने किसी साथी को फोन कर बताया कि वो मेट्रो में बैठ चुका है और सीट भी मिल गई है। सीट चमकती हुई है और एक सीट पर आठ लोग बैठ सकते हैं। उसकी बोल चाल से लग रहा था कि वो ज्यादा पढ़ा लिखा नही है इसलिए मेट्रो का उच्चारण भी मेटरो कर रहा था और रह रहकर बीच बीच में एक दो स्थानीय गाली का इस्तेमाल कर रहा था बावजूद इसके उसके चेहरे पर उत्साह और कॉफिडेंस गजब का था। अपनी बोलचाल से वो वेस्टर्न यूपी के किसी कस्बे का लग रहा था। बड़ा सा अस्त व्यस्त बैकपैक अपनी गोद में लिए वो सीट पर फैल कर बैठा था। शाम के वक्त दफ्तर से घर लौटते मुसाफिरों के कारण मेट्रो खचाखच भरी थी लेकिन इन सब से बेखबर वो अपनी धुन में मस्त था। चार पांच कॉल करने के बाद एक पल वो रूका। अचानक उसे कुछ ध्यान आया और अपने मोबाइल में कुछ तलाशने लगा। अब वो वीडियो कॉल पर था। फेसबुक मैंसेजर में जा वो कहीं वीडियो क़ॉल लगा चुका था। दूसरी तरफ किसी महिला ने फोन उठाय़ा।। बुआ राम राम उसने कहां। “काहा बनायो है...काहा सब्जी बनाई है। रोटी पानी खा लिया” उसने लगातार दो तीन सवाल दाग दिए। दूसरी तरफ की महिला बोली “भैया रामराम कहां घूम रहो है”। बुआ में मेट्रो रेल में बैठो हूं, दिल्ली पहुंच गयो हूं। फूफा कहां हैं उनने ते मेरी राम राम कहियो।“ इस तरह उसने दो तीन बात और की और मोबाइल की ओर हाथ हिलाकर बाय बाय करते हुए कॉल काट दी। इसके बात करने और बैठने के अंदाज के कारण मेट्रो की उस बोगी में ज्यादातर लोगों का ध्यान उस पर था लेकिन वो अपनी रौ में मस्त था। उसे इससे कोई सरोकार नहीं था कि सीट पर फैल कर बैठने की कोशिश में उसने अपने एक पैर पर दूसरा पैर रखा था जैसे अपनी चौपाल में बैठा हो। साथ खड़े यात्री से उसका जूता टच कर रहा था लेकिन इन सब से बेपरवाह वो एक अलग दुनिया में था। उसने जितने भी लोगों को फोन किया उन्हे सबसे पहले ये बताया कि वो मेट्रो में बैठ चुका है। शायद ये उसकी पहली मेट्रो यात्रा थी। अब उसने अपने किसी दोस्त को फोन लगा दिया। दूसरी तरफ से हैलो हुई तो सीधा सवाल किया। “हापुड़ वाले होटल का सौदा हुआ कि नहीं?” दूसरी तरफ वाले शख्स ने पता नहीं क्या कहा। कुछ पल वो उसकी बातों को सुनता रहा और फिर बोला। “अच्छा बिक गया तो वो मेरठ वाला होटल दिलवा दो। उसकी लोकेशन अच्छी है। पार्टी कितना मांग रही है। चार करोड़। नहीं ज्यादा है। बैठ कर बात करवा दो। बयाना कर देते हैं। पर करना जल्दी कहीं ये हापुड़ की तरह हाथ से ना निकल जाए। उसने एक सांस में कह दिया।“ दूसरी तरफ मौजूद शख्स ने पता नहीं क्या कहा लेकिन वो कुछ पल मोबाइल को कान से लगाए रहा। शायद दूसरी तरफ से फोन कट चुका था या काट दिया गया था। उसने मोबाइल कान से हटाया और फिर फोन की स्क्रीन को अपनी शर्ट से रगड़ कर साफ करने लगा। उसके वार्तालाप का अंदाज ऐसा था कि आसपास खड़े लोगो का ध्यान रह रहकर उस पर जा रहा था। ऊंची आवाज में जब वो करोड़ों की बात करने लगा तो जो लोग ईयर फोन लगा मोबाइल में गाने सुन रहे थे या मूवी देख रहे थे वो भी उसकी बातों को ध्यान से सुनने लगे। कहा किसी ने कुछ नहीं बस एक दूसरे की तरफ देख मुस्कुरा रहे थे। लेकिन वो सीट पर बैठा अपने मोबाइल फोन की एड्रेस बुक में अगली कॉल करने के लिए कोई और नंबर तलाश रहा था।

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