Posts

Showing posts from June, 2015

देश भक्ति की आड़ में

सुबह के पांच बजे थे।। वो पांचों उस गेट पर खड़ी थी जो आनंद विहार बस अड्डे को रेलवे स्टेशन से जोड़ता है। सभी के हाथों में स्टैम्प साइज के तिरंगे थे जिनमें लगी पिनों को हर आने जाने वालों की शर्ट पर टांग रही थी। शांत अंदाज में नफासत भरे तरीके से लूट जारी थी। हर आने जाने वाले से वो पचास से सौ रुपये उगाही कर रही थी। आनंद विहार रेलवे स्टेशन दिल्ली के बाकी बड़े स्टेशनों की तरह अभी पूरी तरह आबाद नहीं है। कुछ गिनी चुनी ट्रेन ही यहां से आती जाती हैं। मुझे और मेरे साथी को सुबह सवा छह बजे रवाना होने वाली काठगोदाम शताब्दी पकड़नी थी। साथी के आने में देर थी लिहाजा स्टेशन के बाहर खड़ा हो उसका इंतजार कर रहा था। उनकी कारगुजारियां जारी थी और हर आने जाने वाले उऩका शिकार बन रहा था। पर उन्हें रोकने वाला कोई नहीं था । मैं उनसे करीब दस कदम दूर खड़ा पिछले दस मिनट से उनकी कारगुजारी देख रहा था। अचानक उऩमें से एक मेरी ओर बढी। उसने जैसे ही मेरे कोट पर फ्लैग लगाना चाहा मैंने उसे डांट दिया। वो सकपका गई। बोली डांटते क्यों हो सर। नहीं लगवाना तो मत लगवाओ, ये कह वो लौट गई और बाकी शिकार की खोज में जुट गई। लूटमारी सरेआम थी...