मेट्रो में ममता
वो लगातार बच्चे पर प्यार उड़ेल रही थी। कभी उसे आंचल में समेट लेती तो कभी प्यार से उसके गाल पर चिकोटी काटती। बच्चा भी रह रह कर कभी अपना सिर महिला की गोद में रख लेता तो कभी अपने लटके पैरों को हिलाने लगता। आर के आश्रम स्टेशन से मेट्रो में चढ़ते ही मेरा ध्यान बड़ी सीट पर कोने में बैठे इन तीन लोगों पर गया। महिला बीच में थी। उसके दाएं ओर तीन साल की बच्ची और बाई तरफ करीब सात साल का ये सांवला लड़का बैठा था जिसे वो लगातार प्यार कर रही थी। लड़के का चेहरा मोहरा कुछ ऐसा था जैसे झारखंड के आदिवासी बच्चे होते हैं। हाफ स्लीव टी शर्ट पहने उस लड़के को स्किन की कोई गंभीर बीमारी थी। उसकी वजह से चेहरे और हाथ की स्किन उखड़ने लगी थी। बावजूद इसके वो लड़का महिला से हंस हंस कर बातें कर रहा था। और महिला भी अपना प्यार देने में कोई कसर नहीं छोड़ रही थी। पढ़ी लिखी वो सुन्दर महिला किसी खाते पीते परिवार से थी। आकर्षक पहनावा और रौबदार चेहरा। उम्र भी ज्यादा नहीं बस पच्चीस छब्बीस साल। बच्ची की शक्ल हूबहू मां पर गई थी। बिलकुल सुन्दर गुड़िया की माफिक। मेट्रो में आसपास खड़े कुछ लोगों का ध्यान उस प्यारी सी गुड़िया की ओर थ...