ओपन आशियाना
वह दो फीट लंबा और मात्र छह इंच चौड़ा छज्जा था जो खिड़की के ऊपर बना था। इसी को अब उसका आशियाना बना दिया गया था। डरा सहमा सा वो खुद को खुद में समेटे अपनी चोंच को इधर उधर करते मां की राह तकता रहता था। मां आती तो वो अपना मुंह खोल उसकी मजबूत चोंच से खाना छीनने की कोशिश करता। मां उसकी बेताबी को भांप जाती। अपनी चोंच से तुरंत उसके मुंह में खाना देती। वो भी चहकता हुआ खा लेता और निकल रहे अपने पंखों को हिलाने की कोशिश करता। मैं और पत्नी गाहे बगाहे बॉलकनी में आते तो सामने के घर के इस छज्जे को देख पल भर रुक जाते थे। दरअसल पड़ोसी ने जब अपने एसी की सर्विस करवाई तो कबतूर का ये घोंसला ठीक विंडो एसी के ऊपर बना था। एसी उतारते समय घोंसला टूट गया तो फिलहाल बच्चे को उस खुले छज्जे पर जगह दे दी गई। अब यही इसका आशियाना था। लेकिन एक डर भी था कही कोई बिल्ली या चील उसे शिकार ना बना ले। चील का डर कम था क्योंकि वो इलाके में यदा कदा ही दिखती थी लेकिन बिल्ली का डर लगातार बना हुआ था। परिवार के सभी सदस्यों की सुबह उठते ही नजर उस छज्जे पर ही जाती थी। उसे वहां मौजूद देख सबके चेहरों पर मुस्कुराहट अपने आप तैर आती थी। धूप...