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हाथ के हुनर का क्या कहना

“तय तो पचास रुपये हुए थे। अब आप ये तीस दिखा रहे हो। भला ये कोई बात हुई। आप ये तीस भी रख लो। काम करता हूं पक्का। कोई खैरात नहीं मांग रहा हूं। आपको पहले ही बता दिया था कि पॉलिश और सोल की सिलाई के पचास लगेंगे। भाई साहब इस काम को अगर कोई सौ रुपये से कम में कर दे तो मुझे एक पैसा भी मत देना और चार जूते अलग से मार लेना।“ गुस्साए मोची ने एक सांस में उस ग्राहक से सब कह डाला। पास बैठा मैं भी अपने जूते पॉलिश करवाने का इंतजार कर रहा था। बने संवरे उस नौजवान ने पॉलिश और सोल सिलाई के बाद अपने वुडलैंड के लाल जूते पर जहां तहां एक दो टांके और लगाने को कहे। मोची ने चुपचाप लगा दिए लेकिन जब पैसे देने की बारी आई तो कम पकड़ाने लगा। बस मोची का पारा गरम हो गया। मोची को लाल पीला होता देख लड़के ने चुपचाप पचास रुपये उसके हवाले किए और चलता बना। अब मोची ने मेरे जूते हाथ में ले उन पर एक नजर डाली और पूछा “कहां से पॉलिश करवाई थी इससे पहले। जूते का सत्यानाश कर दिया। लाल पॉलिश तो की है, काले सोल पर भी वही पॉलिश मार दी। ऐसे इधर उधर पॉलिश मत करवाया करो। उसने उलहाने वाले स्वर में कहा। लोग पॉलिश का मतलब काला समझते हैं जबकि...