बोर्ड इम्तिहान का खौफ
गर्मी बिल्कुल नहीं थी बावजूद इसके उसके माथे से पसीना बह रहा था। सांसे तेज चल रही थी। हाथों में थामी कुछ मोटी किताबें को सीने से लगाए वो मम्मी पापा की बातें सुन रही थी। एग्जाम शुरू होने में अभी एक घंटे से ज्यादा बाकी था। इन तीनों के साथ चौथे सज्जन भी वहां थे जो शायद उसके ट्यूटर थे। वो भी बीच बीच में लड़की को टिप्स दे रहे थे। लड़की कभी ट्यूटर की ओर देखकर सिर हिलाती तो कभी मम्मी पापा की ओर देख गर्दन हिलाने लगती। कुछ ध्यान में आता तो उन किताबों के पन्ने पलटने लगती जो उसने थामी हुई थी। सीबीएसई का आज बारहवीं कक्षा का पहला बोर्ड एग्जाम था। पहला दिन था तो ज्यादातर बच्चे वक्त से पहले पहुंच गए। ज्यादातर के चेहरों पर अजीब का खौफ पसरा था। जिंदगी के पहले कड़े एग्जाम के लिए तैयारी तो सभी ने की होगी लेकिन बोर्ड के नाम से डरे डरे से थे। लड़कियां अपने ग्रुप में तो लड़के अपने गुट में चर्चा में मशगूल थे। चूंकि बोर्ड का एग्जाम है इसलिए सेंटर दूसरे स्कूल में है। बच्चों को सेंटर तक छोड़ने के लिए कुछ माता पिता साथ आए हैं तो कुछ लड़के लड़कियां खुद अपनी स्कूटी और बाइक से पहुंचे हैं। कुछ बच्चों के माता पिता ...