डिजिटल इंडिया की सच्चाई
दोस्त झुंझलाता सा दफ्तर में दाखिल हुआ और फट पड़ा । “क्या यार ये बैंक है या आफत। पिछले तीन घंटे में तीसरी बार एसबीआई का चक्कर लगा चुका हूं लेकिन बैंक का सर्वर तब से ही डाउन है। अगर आज एकाउंट में पैसे नहीं जमा कराए तो होम लोन का ईसीएस जंप कर जाएगा और मुझे पैनल्टी भरनी पड़ेगी। प्राइवेट बैंक का लोन है एक किस्त ना जमा करने पर सैकड़ों फोन आएँगें सो अलग।“ मैंने उसे शांत कर कुर्सी ऑफर की और कंधे पर हाथ रख कहा कि थोड़ा बैठ जाओ। देखते हैं कि दिक्कत का उपाय क्या है। दोस्त की दिक्कत वाजिब थी। उसे उस दिन एक जरूरी स्टोरी फाइल करनी थी। छुट्टी ले नहीं सकता था सो दफ्तर आते ही उसने सोचा कि क्यों ना पहले बैंक का काम निपटा लिया जाए। कुछ देर में आने की कह वो बैंक खुलते ही दफ्तर से निकल गया। बैंक पहुंचते ही देखा कि वहां तो लोगों का सैलाब जमा है। सर्वर डाउन है इसलिए बैंककर्मी मस्त हैं और लाइन में लगे ग्राहक पस्त । कोई काम नहीं हो रहा। दोस्त लौट आया । कुछ देर काम करने के बाद वो इस उम्मीद में बैंक लौटा कि शायद सर्वर ठीक हो गया होगा लेकिन इस बार हालत पहले से बदतर थे। बैंक लोगों से खचाखच भरा हुआ था और पैर रखने...