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मेट्रो में हिन्दी की क्लास

हिन्दी में चलो कैसे बोलेंगे वो लगातार इसकी प्रैक्टिस कर रहे थे। पहली बार में उनकी जुबान से श्लो निकला तो गाइड ने समझाया कि कैसे बोलना है। उऩ चारों फिरंगियों ने एक बार फिर कोशिश की लेकिन नाकाम रहे। दो गुटों में ये छह विदेशी अक्षरधाम स्टेशन से मेट्रो में चढ़े थे। साथ में गाइड भी था। कोच में आते ही दो महिलाएँ तो अलग अपनी बातों में मशगूल हो गई जबकि बाकी चार अपने गाइड के साथ खड़े हो गए। जो चार गाइड के साथ खड़े थे उनमें दो महिलाएं और दो पुरुष थे। पुरूषों ने हाफ पैंट पहनी थी और सिर पर टोपी कुछ इस तरह लगाई थी कि उसका अगला भाग पीछे की ओर था। उनके साथ की महिलाओं में एक करीब सवा छह फीट लंबी थी। विदेशी के साथ अपनी लंबाई के कारण उन महिलाओं पर कोच के ज्यादातर यात्रियों की निगाह थी लेकिन वो इन सबसे बेखबर हिन्दी सीखने में बिजी थी। ये विदेशी जब मेट्रो में घुसे तो कुछ यात्री गेट पर खड़े थे। उन्हें हटाने के लिए गाइड ने सबसे पहले बोला था चलो। यात्री हट गए तो सभी विदेशी एक कोने में खड़े हो चलो शब्द का मतलब पूछने लगे। गाइड ने उन्हें इंग्लिश में इसका मतलब बता दिया। अब सब की उत्सुकता थी कि चलो को बोला कैसे ...