सरकारी सिम का सितम
पांच बजे चुके थे। साथी के साथ तेजी से रोहिणी सेक्टर तीन के संचार हाट पहुंचा। डर था कहीं बाबू चले ना गए हो? और सरकारी दफ्तर की तरह वहां की टाइमिंग भी दस से छह है लेकिन क्या भरोसा कोई मिले या नहीं। आगे ब ढ़ा ही था कि गेट पर गार्ड ने रोक लिया। पूछा कहां जाना है। मैंने कहा माइक्रो सिम लेना है। कमरा नंबर दो में जाइये। उसने कहा। उनकी उम्र पचपन साल के करीब होगी होगी। वो कमरा नंबर दो में क्रीम कलर का सफारी सूट पहने टेबल पर पेन से खेल रहे थे। टेबल पर चारों तरफ बेतरतीब ढंग से फॉर्म बिखरे थे। हफ्ते भर से बढ़ी पकी दाढ़ी इशारा कर रही थी कि वो धूप में नहीं अनुभव के कारण सफेद हुई है। सामने लोहे की जुड़वा टेबल थी। वैसी जैसी सरकारी अस्पतालों में होती हैं। क्या काम है? उन्होंने चश्मे के पीछे से झांकते माथे पर सलवट लाते हुए कहा। स्मार्ट फोन में डालने के लिए माइक्रो सिम लेना है। मैंने कहा। पहचान पत्र लाए हो। उनका अगला सवाल था। मैंने कहा पहचान पत्र तो नहीं है पर ड्राइविंग लाइसेंस है। लाइसेंस पर पता वहीं है ना जो हमारे रिकॉर्ड में है। उन्होंने सवाल किया। जी हां, वही है मैंने सहमति में सिर हिलाया। फोटो कॉ...