Posts

Showing posts from July, 2015

ताशकंद की तह

वो छह फीट का गोरा लंबा नौजवान था। ताशकंद एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही वो हमारी तरफ बढ़ा। टैक्सियों की लंबी कतार में लगी कार उसी की थी। उसे हमारा इंतजार था। बुखारा चलोगे। हमारे तीसरे साथी ने उज्बेक भाषा में कहा। सौदा तीन सौ डालर में तय हुआ। विद एसी। एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही हम अगले पांच मिनट में कार में बैठे थे। ताशकंद एयरपोर्ट ज्यादा बड़ा नहीं है। दिल्ली के टर्मिनल थ्री के मुकाबले ये उसका बीसवां हिस्सा भी नहीं है। अगर देश के किसी एयरपोर्ट से तुलना करें तो जयपुर और सूरत एयरपोर्ट भी इससे बड़े और भव्य नजर आते हैं। ताशकंद से बुखारा करीब पांच सौ पचास किलोमीटर दूर है। सफर लंबा था। हमारा तीसरी साथी अक्सर बिजनेस के सिलसिले में उज्बेकिस्तान जाता रहा है। दिल्ली का रहने वाला है लेकिन फर्राटेदार उज्बेकी बोलता है। वहां के कायदे कानूनों से भी भली भांति परिचित है। लंबे सफर को देखते हुए सोचा क्यों ना पानी की बोतल ले ली जाए। ड्राइवर ने साइड में कार रोक दी। दुकान पर छोटी बोतल थी नहीं लिहाजा पांच लीटर का कैन ले लिया। तीनों साथियों ने भर पेट पानी पिया। लगा ड्राइवर भी प्यासा है क्योंकि बैक मिरर में वो हमें...